हादसे से बाद जागा RTO, नियमों का सख्ती से पालन कराने जुटा विभाग
भोपाल
सीधी में हुए बस हादसे के बाद अब परिवहन विभाग फिर से चेता है। राजधानी सहित पूरे प्रदेश में अब पहले से बने परिवहन नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए अफसर जुट गए हैं। परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्देश पर अफसरों ने यात्री बसों के संबंध में बनाए गए कई नियमों को खंगालना शुरू कर दिया है।
इसमें 32 सीटर बसों को 75 किलोमीटर से ज्यादा दूरी का परमिट नहीं देने, ओवरलोडिंग करने वाली यात्री बसों का औचक निरीक्षण करने, यात्री बसों में इमरजेंसी गेट व्यवस्थित होने, बसों में किराया सूची चस्पा होने सहित कई नियमों को खंगाल कर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। भोपाल में 32 सीटर बसों के परमिट संबंधी जारी जानकारी की सूची तैयार की जा रही है।
परिवहन मंत्री के निर्देश के बाद परिवहन विभाग के आला अधिकारियों ने परिवहन विभाग के उड़नदस्ता एवं चैकिंग अमले को सख्त चेतावनी दी है कि यदि अब औचक निरीक्षण के दौरान तय नियमों और यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ पाया गया, तो इसमें गड़बड़ी करने और जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरेगी। ऐसे में वे चैकिंग में तय मानकों को अवश्य देखें और उसके हिसाब से यात्री बसों की जांच करें।
परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के पास शिकायत पहुंची है कि कई बस आॅपरेटर ‘के’ फार्म (बसों को कंडम या नहीं चलने लायक वाला फार्म) भरकर बसें खड़ी करने की बात कह रहे हैं। लेकिन आॅपरेटर इन बसों को संचालित करके विभाग को करोड़ों रुपए की चपत लगा रहे हैं। ‘के’ फार्म पर बस को खड़ी कर अवैध रूप से टैक्स की चोरी कर प्रदेश में बसें चल रही है। प्रदेश में ऐसी बसें अधिकारी और परिवहन माफिया की मिली भगत से चल रही हैं।
ॅ पन्ना में 2015 में बस हादसे में करीब 40 यात्रियों की जलकर मौत हो गई थी। इसके बाद तत्कालीन परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बसों में ओवरलोडिंग, इमरजेंसी गेट, किराया सूची सहित कई सुरक्षा के इंतजाम के निर्देश दिए थे।
ॅ 3 अक्टूबर, 2019 को इंदौर से छतरपुर जा रही एक यात्री बस रायसेन में अनियंत्रित होकर रीछन नदी में गिर गई थी। इसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। तब परिवहन मंत्री गोविंद सिंह ने नियम बनाया था कि 32 सीटर बसों को 75 किलोमीटर से ज्यादा दूरी का परमिट नहीं मिलेगा।

पाठको की राय